BIT के शुरुआत के दिनों से अगले तीन सालों तक साथियों के साथ मिल जुल कर किये गए हवाई यात्रा, अब अपने ऊँचाई पर आ गयी थी। अब पारा-सेलिंग के लिए आसमान से छलांग लगाने का समय आ गया था। इतने दिनों की पढ़ाई करने के बाद मिलने वाले डिग्री के पैराशूट लगाये हम तैयार तो थे, पर इस तरह से जिंदगी के धरातल पर, अकेले हनुमान कूद लगाने की हिम्मत जुटाने में काफी समय लगा जा रहा था।
कल तक कॉलेज में पढ़ने वाले कई सीनियर्स कभी-कभी वापस कैंपस में दीख जाते थे। उनसे ज़िंदगी की कड़वी सच्चाइयों को सुनने के बाद ऐसा महसूस होता था कि - सिर्फ इंजीनियरिंग की डिग्री से न तो नौकरी मिल पाती है और न ही उस से कोई ख़ास गुज़ारा हो पाता है। अगर किसी तरह से नौकरी का जुगाड़ हो भी जाए तो आगे ज़िन्दगी के फर्नेस में और भी बहुत सारे ईंधन की ज़रूरत पड़ती थी - जिसका हमें अभी तक कोई अंदाज़ा ही नहीं था- अनुभव होना तो बहुत दूर की बात थी।
कल तक कॉलेज में पढ़ने वाले कई सीनियर्स कभी-कभी वापस कैंपस में दीख जाते थे। उनसे ज़िंदगी की कड़वी सच्चाइयों को सुनने के बाद ऐसा महसूस होता था कि - सिर्फ इंजीनियरिंग की डिग्री से न तो नौकरी मिल पाती है और न ही उस से कोई ख़ास गुज़ारा हो पाता है। अगर किसी तरह से नौकरी का जुगाड़ हो भी जाए तो आगे ज़िन्दगी के फर्नेस में और भी बहुत सारे ईंधन की ज़रूरत पड़ती थी - जिसका हमें अभी तक कोई अंदाज़ा ही नहीं था- अनुभव होना तो बहुत दूर की बात थी।